
भुगतान का नया चैनल
भारत से बासमती खरीदने वाले ईरान के आयातक भारतीय रुपये में लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) खुलवा सकते हैं। इससे भारतीय निर्यातकों को भुगतान मिलेगा। ईरानी आयातकों नए सौदे करने के लिए इस चैनल के चालू होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
भारत से बासमती चावल आयात करने वाले ईरान के आयातक भारतीय रुपये में लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) खुलवा सकते हैं। इससे भारतीय निर्यातकों को सप्ताह निर्यात किए गए बासमती का भुगतान मिलने की उम्मीद बनी है। यह जानकारी ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय सेतिया ने दी है।
भारत ने पिछले सप्ताह कहा था कि भारतीय निर्यातक रुपये में निर्यात किए गए चावल का भुगतान पा सकते हैं। अमेरिका द्वारा ईरान पर बैंकिंग संबंधी प्रतिबंध लगाने के बावजूद भारत ने व्यापारिक संबंध बनाए रखने के लिए यह व्यवस्था की है।
सेतिया ने यहां आयोजित ग्रेन कांफ्रेंस के बाद संवाददाताओं को बताया कि भुगतान की नई व्यवस्था उन्हें इस सप्ताह चालू होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि भारतीय निर्यातकों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि ईरान को चावल की सप्लाई अप्रत्यक्ष तौर पर होती है और उन्हें 90 से 220 दिन की क्रेडिट सुविधा देनी पड़ती है।
उन्होंने बताया कि कमजोर होती ईरानी मुद्रा के चलते ईरान के खरीददारों को चावल का भुगतान करने में ज्यादा मुश्किल आ रही है। ईरानी मुद्रा के एक्सचेंज रेट में भारी उथल-पुथल की वजह से पिछले दो माह से चावल खरीद न कर पाने वाले एक ईरानी आयातक ने कहा कि रुपये में भुगतान की व्यवस्था से उन्हें राहत मिल सकती है।
मोहसिन लाइन ट्रेडिंग कंपनी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर शहरोख खाजेई ने कहा कि अभी रुपये में भुगतान की व्यवस्था चालू नहीं हुई है लेकिन जल्दी ही यह चैनल खुलने की उम्मीद है।
हम छोटी मात्रा से चावल का आयात शुरू करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हर साल करीब दो लाख टन चावल (अधिकांश भारतीय सप्लाई) का कारोबार करने वाली मोहसिन ट्रेडिंग के इस अधिकारी ने बताया कि भारत में हमारे कार्गो तैयार खड़े हैं लेकिन हम भुगतान के संबंध में स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं।
संयुक्त अरब अमीरात की एक एग्री फर्म के अधिकारी ने बताया कि दुबई से करीब 3.6 लाख टन चावल का पुनर्निर्यात किया जाता है और इसमें से ज्यादा 90 फीसदी माल ईरान को भेजा जाता है। मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था और सरकार की खाद्य सुरक्षा योजना के चलते दुबई में भारी मात्रा में खाद्यान्न का स्टॉक किया जाता है।
इसमें से बड़ी मात्रा में पुनर्निर्यात किया जाता है। दुनिया के 93 फीसदी चावल का पुनर्निर्यात दुबई से ही होता है लेकिन आर्थिक प्रतिबंधों के चलते यह हिस्सेदारी घटने की आशंका है। अल दहरा एग्री कंपनी के डायरेक्टर (सप्लाई चैन) ब्रायन बेरिसकिल ने कहा कि प्रतिबंधों के चलते भारत से ईरान को प्रत्यक्ष निर्यात बढ़ सकता है