सोमवार, 20 फ़रवरी 2012

बासमती की जल्दी पकने वाली किस्म विकसित

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) ने बासमती चावल की नई किस्म पूसा-1509 विकसित की है जिसके पकने की अवधि पूसा बासमती 1121 के मुकाबले 20 दिन कम होगी। आईएआरआई के डायरेक्टर डॉ. एच. एस. गुप्ता का कहना है कि किसानों की आय में बढ़ोतरी के लिए उनकी उपज की प्रोसेसिंग को बढ़ावा देना जरूरी है। जिस अनुपात में किसानों की लागत बढ़ रही है, उस अनुपात में जिंसों के दाम नहीं बढ़े हैं। इसीलिए किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाना चाहिए।



उन्होंने बताया कि खाद्यान्न और फल सब्जियों के बंपर उत्पादन में आईएआरआई के कृषि वैज्ञानिकों का अहम योगदान रहा है। देश में गेहूं और चावल का रिकॉर्ड उत्पादन होने का अनुमान है। यह उन्नत किस्मों के बीजों के कारण ही हो पाया है। किसानों को प्रमाणित बीजों की उपलब्धता बराबर बनी रहे, इसके लिए हम पूरा प्रयास कर रहे हैं। वर्ष 2011 में संस्थान ने चावल की नई किस्म पूसा बासमती-1121 विकसित की थी। इसके अलावा संस्थान ने बासमती चावल की नई किस्म पूसा-1509 विकसित की है जिसकी पकाई अवधि पूसा बासमती 1121 के मुकाबले 20 दिन कम है।


उन्होंने बताया कि गेहूं की पीबीडब्ल्यू 343 में यलो रस्ट की बीमारी लगने का खतरा ज्यादा रहता है इसलिए संस्थान ने इसको बदलने के लिए नई किस्म एचडी 2967 विकसित की है, जिसकी उत्पादन क्षमता 5.5 टन प्रति हैक्टेयर है। पंजाब और हरियाणा के किसानों ने चालू रबी में इसकी बुवाई भी की है। उन्होंने बताया कि संस्थान ने सब्जियों के साथ ही फलों के भी उन्नत किस्मों के बीज संस्थान ने विकसित किए हैं, जिनसे किसानों की आय में बढ़ोतरी हो रही है।