बिजनेस भास्कर नई दिल्ली
कारोबार में बेहतरी
रुपये की कमजोरी से निर्यात के ऑर्डरों में भारी बढ़ोतरी
यार्न मिलों के पास एक-डेढ़ माह के लिए ऑर्डर उपलब्ध
नए निर्यात ऑर्डरों के चलते मिलों का बकाया स्टॉक घटा
मिलों के पास सिर्फ 15-20 दिन का कॉटन यार्न स्टॉक
एक माह में 30 काउंट यार्न 15 रुपये बढ़कर 166-177 रुपये प्रति किलो हो गया
एक ओर जहां गारमेंट कंपनियां उत्पादन कम करने की योजना बना रही हैं, वहीं मध्य प्रदेश की कॉटन यार्न कंपनियां उत्पादन बढ़ाने की तैयारी कर रही है। तेजी से बढ़ रहे निर्यात आर्डरों ने कंपनियों को बड़ा सहारा दिया है। इससे कंपनियों के पास एकत्रित दो महीने तक का स्टॉक कम होकर सामान्य स्तर पर आ गया है।
कुछ महीनों पहले घरेलू यार्न निर्माताओं को आर्डरों में भारी कमी के चलते काफी स्टॉक एकत्रित हो गया था। प्रदेश की सभी कंपनियों के पास 45-60 दिन का स्टॉक जमा हो गया था। हालात इतने खराब थे कि कंपनियों द्वारा उत्पादन में कमी करने के बाद भी स्टॉक बढ़ता जा रहा था। लेकिन नवंबर-जनवरी के दौरान रुपये की कमजोरी ने उनके पास निर्यात ऑर्डरों की नई लहर ला दी।
प्रदेश की सभी कंपनियों के पास आगे एक से डेढ़ महीनों के लिए ऑर्डर हैं। इन निर्यात आर्डरों के चलते कंपनियों को स्टॉक कम करने में काफी मदद मिली है। कंपनियों के पास यार्न का स्टॉक घटकर 15-20 दिन का रह गया है। कंपनियों को ऑर्डर तो और ज्यादा मिल रहे है किंतु पिछले साल से सबक लेते हुए कंपनियां लंबी अवधि के ऑर्डर नहीं ले रही हैं।
मध्य प्रदेश टेक्सटाइल मिल एसोसिएशन के वाइस चेयरमैन टी. के. बल्दुआ ने बिजनेस भास्कर को बताया कि कंपनियों के पास फिलहाल ऑर्डरों की कोई कमी नहीं है। यूरोपीय देश और चीन की ओर से काफी ऑर्डर आ रहे है किंतु आगे कपास की कीमतों का क्या रुख रहेगा और रुपया किस ओर जाएगा, इसको लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। पिछले साल कंपनियों को कपास की खरीद में काफी नुकसान हुआ था, इसको देखते हुए कंपनियां लंबी अवधि के ऑर्डर नहीं ले रही है।
ऑर्डर बढऩे और कपास के दाम में नरमी से कंपनियों के मार्जिन भी बेहतर हो गए हैं। कपास के दाम में आई नरमी और यार्न के दामों में बढ़ोतरी से कंपनियों को मार्जिन अच्छे मिल रहे है। प्रतिभा सिंटेक्स के कार्यकारी निदेशक श्रेयस्कर बंसल कहते है कि कॉटन यार्न निर्माताओं की स्थिति काफी बेहतर हो गई है। कपास के दामों में हाल की गिरावट ने काफी सहारा दिया है। इसके अलावा बढ़ते ऑर्डरों की वजह से कंपनियों ने कॉटन यार्न के दाम भी बढ़ा दिए है। इससे निर्यात में मार्जिन बढ़ गए है। पिछले एक महीनों के दौरान 30 काउंट कॉटन यार्न के दाम 15 रुपये बढ़कर 166-177 रुपये प्रति किलो पहुंच गये हैं।
इसी दौरान कपास के दाम 36,500 रुपये से घटकर 33,000 रुपये प्रति कैंडी (प्रति कैंडी 356 किलो) रह गये हैं।
मध्य प्रदेश से वित्त वर्ष 2010-11 के दौरान कुल 1800 करोड़ रुपये के टेक्सटाइल उत्पादों का निर्यात हुआ था। इसमें से करीब 1020 करोड़ रुपये का यार्न निर्यात था। इसके अलावा 314 करोड़ रुपये का विस्कोस फाइबर, 300 करोड़ रुपये निटेड गारमेंट, 115 करोड़ रुपये निटेड फैब्रिक शामिल थे।