रविवार, 19 फ़रवरी 2012

उन्नत कृषि की राह

plenty for all-देश में आज भी कृषकों का एक बड़ा वर्ग कृषि के लिए पारंपरिक पद्धति पर निर्भर है। लोगों का कृषि के उन्नत व तकनीकी स्वरूपों से परिचय नहीं है। तथ्यात्मक सत्य यह भी है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास का कारवां तभी आगे बढ़ सकता है जब स्वयं ग्रामीण विकास की कड़ियों से जुडें और चीजों को समझकर उन्हें आगे बढ़ाने में योगदान भी दें। यह तभी संभव है जब ग्रामीणों तक सहज भाषा में सारी जानकारियां पहुंच सके।

इसी कोशिश में प्रयोग परिवार से जुड़ी, प्रकृति का निकट से परिचय कराती पुस्तक ‘सर्व सुलभ समृद्धि’ आई है। यह पुस्तक अंग्रेजी की मूल पुस्तक ‘प्लेंटी फार आल’ का परिवर्द्धित व संशोधित हिन्दी संस्करण है। पुस्तक का मूल उद्देश्य कृषि विज्ञान से संबंधित जानकारियों को आम और सरल भाषा में जन-जन तक पहुंचाना है।

मूल कृति के लेखक प्रोफेसर श्रीपाद अच्युत दभोलकर हैं, जो खुद ग्रामीण विकास को प्रकृति से जोड़कर देखने के पक्षधर माने जाते हैं। इसका अनुवाद डा. आर.एस. धनोतिया ने किया है। पुस्तक को आठ खंडों में बांटा गया है। जिनमें प्रकृति का परिचय, उसके महत्वपूर्ण कारकों तथा ऊर्जा के स्त्रोतों से मिलने वाले फायदे और उन्नत तरीकों का परिचय है। इससे मिलने वाले फायदों को भी रेखांकित किया गया है।

पुस्तक : सर्व सुलभ समृद्धि

लेखक : श्रीपाद अच्युत दाभोलकर

अनुवादक : आर.एस. धनोतिया

प्रकाशक : अकेडमा प्रकाशन, इंदौर