सोमवार, 27 फ़रवरी 2012

आयातित डीएपी और पोटाश की नई सप्लाई पर रोक

बिजनेस भास्कर नई दिल्ली

सब्सिडी खर्च बचाने के लिए पहले से उपलब्ध उर्वरकों की ही सप्लाई करने के निर्देश दिए सरकार ने

केंद्र सरकार ने फरवरी और मार्च में बंदरगाहों पर पहुंचने वाले उर्वरकों खासकर डीएपी और पोटाश की उठान न करने का निर्देश दिया है। इस समय उर्वरकों की मांग बहुत कमजोर है। इस वजह से सप्लाई धीमी पडऩे से कोई असर नहीं पड़ेगा। उर्वरकों का उठान रोकने के पीछे सरकार का एक मकसद सब्सिडी बिल पर अंकुश लगाना है। अनुमान के तौर पर इस कदम से सरकार चालू वित्त वर्ष में 1,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी के खर्च से बच सकेगी।


ताजा आदेश में उर्वरक मंत्रालय ने कहा है कि यूरिया को छोड़कर बाकी सभी उर्वरक डीएपी, पोटाश और काम्प्लैक्स फर्टिलाइजर की बंदरगाहों से किसी भी राज्य को सप्लाई न की जाए। मंत्रालय ने अगले आदेश तक सप्लाई रोकने को कहा है।
सूत्रों के अनुसार चूंकि सरकार ने अगले वित्त वर्ष में इन उर्वरकों पर सब्सिडी घटाने का फैसला किया है। इस वजह से चालू वित्त वर्ष में सरकार करीब 1,000 करोड़ रुपये के सब्सिडी बिल से बच सकेगी। इन दोनों महीनों में बंदरगाहों पर करीब चार लाख टन उर्वरक पहुंचने की संभावना है।


सरकार कंपनियों को उर्वरकों पर सब्सिडी वास्तविक बिक्री के आधार पर देती है। इन कंपनियों में इफको, पीपीएल, चंबल फर्टिलाइजर्स और इंडियन पोटाश शामिल हैं। सरकार इन उर्वरकों पर अगले वित्त वर्ष से सब्सिडी घटा रही है जबकि कंपनियां चार लाख टन आयातित उर्वरकों पर सब्सिडी के लिए दावा कर सकती है।


इसी वजह से सरकार ने यह कदम उठाया है। इन दिनों उर्वरकों की मांग भी कमजोर पड़ी है। सरकार इस साल डीएपी पर 19,763 रुपये और पोटाश पर 16,054 रुपये प्रति टन सब्सिडी दे रही है। अगले वित्त वर्ष में इन पर सब्सिडी घटकर क्रमश: 15,263 रुपये और 15,000 रुपये प्रति टन रह जाएगी। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन उर्वरकों के दाम घटने की वजह से सब्सिडी घटाने का फैसला किया है।


सरकार ने कंपनियों से कहा है कि चालू फरवरी माह के शुरू तक उपलब्ध उर्वरकों की सप्लाई फरवरी और मार्च की खपत के लिए की जाए। नई खेप उठाने की कोई जरूरत नहीं है। इन दोनों उर्वरकों के दाम बढऩे की वजह से मांग काफी कम हो गई है। उम्मीद है कि फरवरी और मार्च में इनकी मांग कमजोर ही रहेगी