मंगलवार, 21 फ़रवरी 2012

कृषि में 4% विकास दर की दरकार : पीएम

बिजनेस भास्कर

12वीं पंचवर्षीय योजना में कृषि अनुसंधान पर दोगुने खर्च के लिए प्रतिबद्धता

कृषि क्षेत्र में चार फीसदी या इससे अधिक वृद्धि दर हासिल करने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के स्वर्ण जयंती सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान कृषि क्षेत्र में शोध एवं विकास पर होने वाले खर्च को कम से कम दोगुना करने को लेकर प्रतिबद्ध है। कृषि क्षेत्र में शोध एवं विकास पर मौजूदा खर्च सकल घरेलू उत्पाद का करीब एक प्रतिशत है।


प्रधानमंत्री ने कहा कि 11वीं पंचवर्षीय योजना में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 3.5 प्रतिशत रहने की संभावना है जो 10वीं पंचवर्षीय योजना के वृद्धि दर के मुकाबले बेहतर है। यह सराहनीय कदम है लेकिन हमें 12वीं पंचवर्षीय योजना में इसे सुधारकर चार फीसदी या इससे अधिक करने पर जोर देना होगा। अधिक विकास दर हासिल करने के लिए कृषि शोध पर ध्यान देना अहम है। भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए कृषि शोध प्रणाली को सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता है।


प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि समृद्ध, उपजाऊ तथा सतत कृषि अर्थव्यवस्था देश के सतत व संपूर्ण विकास की आधारशिला है। सरकार कृषि अर्थव्यवस्था में व्यापक सुधार एवं इसके पुनरुत्थान के लिए काम कर रही है। सरकार ने कृषि की बेहतर पैदावार तथा ग्रामीण आधारभूत संरचना में सुधार के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाई है।


उन्होंने कहा कि 11वीं पंचवर्षीय योजना के अंत तक देश में खाद्यान्न का 25 करोड़ टन उत्पादन होने का अनुमान है जो एक रिकॉर्ड है। प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं के योगदान और उनकी भागीदारी के लिए भी सराहना की।