बुधवार, 29 फ़रवरी 2012

सरसों उत्पादन में 8% गिरावट का अनुमान

आशंका
सरसों का उत्पादन घटकर 63 लाख टन रह जाने का अंदेशा
कृषि मंत्रालय के दूसरे अनुमान से भी कम रहेगा सरसों उत्पादन
बुवाई क्षेत्रफल व खराब मौसम से उत्पादन में गिरावट की आशंका

खराब मौसम व फसल के बुवाई क्षेत्रफल में कमी के कारण चालू सीजन में सरसों का उत्पादन 8 फीसदी तक कम रहने का अनुमान है। औद्योगिक निकाय सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) के मुताबिक सरसों का उत्पादन 8 फीसदी गिरकर 63 लाख टन रह जाने की संभावना है।


एसईए का यह अनुमान समान अवधि के लिए जारी किए गए सरकारी अनुमान से कम है। कृषि मंत्रालय के दूसरे अनुमानित आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2011 से शुरू हुए रबी सीजन 2011-12 में सरसों का उत्पादन 75 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया है।


एसईए के अनुसार सरसों की फसल का बुवाई क्षेत्रफल 6.64 लाख हैक्टेयर कम रहा है जबकि उत्पादन 5.85 लाख टन कम रहने का अनुमान है।
एसईए के मुताबिक बुवाई क्षेत्रफल में कमी के साथ ठंड के कारण खराब हुई फसल से इसका कुल उत्पादन गिरकर 63 लाख टन रह जाने की संभावना है।


पिछले साल सरसों का उत्पादन 68.5 लाख टन रहा था। एसईए के अनुसार बुवाई में देरी और दिसंबर में उच्च तापमान के कारण सरसों की फसल पहले ही 15-20 दिन लेट है। साथ ही अधिक ठंड से गुजरात व पश्चिमी राजस्थान के कुछ भागों में सरसों की खड़ी फसल को हुए नुकसान से उत्पादन में कमी की आशंका है।


एसईए के आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश में सरसों का उत्पादन 2.40 लाख टन कम रहने की संभावना है। पिछले साल यह 3.30 लाख टन दर्ज किया गया था। हरियाणा में पिछले साल के 7.7 लाख टन की तुलना में सरसों का उत्पादन 6.20 लाख टन रहने का अनुमान है। गुजरात में भी उत्पादन 3.30 लाख टन से गिरकर 2.40 लाख टन रह जाने का अनुमान है। हालांकि उत्तरप्रदेश व पश्चिम बंगाल में उत्पादन बढऩे की संभावना है