गुरुवार, 1 मार्च 2012

सरसों, चना व ग्वार की कीमतों में सुस्ती

बिजनेस ब्यूरो

जयपुर बुधवार को सरसों कीमतों में गिरावट का दौर जारी रहा। कीमतों में 50 रुपये प्रति क्विंटल तक का मंदा देखा गया। ग्वार कीमतों में जारी तेजी आज मंदी में बदली। चना कीमतों में भी सुस्ती देखी गई।


चना कीमतों में अधिकतर मंडियों में 100 रुपये प्रति क्विंटल तक का मंदा देखा गया। बुधवार को जयपुर मंडी में ग्वारगम 1500 रुपये प्रति क्विंटल गिरावट के साथ 58,500 रुपये प्रति क्विंटल बोला गया। गेहूं कीमतों में आज भी गिरावट रही। सरसों कीमतों में आज 50 रुपये प्रति क्विंटल तक की गिरावट रही।


जयपुर सहित प्रदेश की अन्य मंडियों में चना कीमतों में गिरावट देखी गई। कपास कीमतें में गिरावट का दौर जारी रहा। ग्वार जयपुर मंडी, अलवर, श्रीगंगानगर व भरतपुर मंडी में कीमतों में 1500 रुपये प्रति क्विंटल तक की गिरावट रही। चने में आज मंदा रहा। दाल कीमतों में गिरावट देखी रही।


किराना कीमतों में मांग दबाव कम रहा। हल्दी में कोई खासा उतार चढ़ाव नहीं रहा। धनिया कीमतों पर मंदी जारी रही। जयपुर मंडी में सरसों में 42 प्रतिशत में 35 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट रही। अलवर में 40 रुपये की गिरावट देखी गई। भरतपुर व श्रीगंगानगर में 35 रुपये प्रति क्विंटल का मंदा देखा गया

दबाव से फसल मुआवजे पर हो सकती है घोषणा

पाले और शीतलहर से खराब हुई फसलों का मुआवजा देने की मांग को लेकर राज्य सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। किसानों के लिए राहत पैकेज की घोषणा राज्य सरकार मार्च माह के पहले सप्ताह में कर सकती है। हालांकि इसके लिए गिरदावरी रिपोर्ट का इंतजार है। पांच मार्च तक प्रदेश के सभी संभागों में गिरदावरी रिपोर्ट संकलित होने की संभावना है।


हालांकि किसान गिरदावरी रिपोर्ट से पहले ही तत्काल सहायता देने की मांग कर रहे हैं। विधानसभा में भी यह मामला सत्र की शुरुआत से गरमाया हुआ है। विपक्ष की नेता वसुंधरा राजे ने कहा कि विपदा के समय किसानों के आंसू पोंछना सरकार का काम है। सरकार को चाहिए कि वह किसानों को मुआवजा दे।


भाजपा के राजेंद्र सिंह राठौड़ ने पाले और शीतलहर से पूरे प्रदेश में किसानों की फसल चौपट होने का मुद्दा उठाया हुआ है। उन्होंने ने कहा कि पिछली सरकार की तर्ज पर इस बार भी किसानों को पैकेज दिया जाना चाहिए।


हालांकि मुआवजे की मांग पर आपदा राहत राज्य मंत्री बृजेंद्र सिंह ओला का कहना है कि भाजपा सरकार के समय सीआरएफसे किसानों को जो पैकेज दिया गया था। उसका अब तक ऑडिट पैरा लंबित पड़ा है। संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल के अनुसार प्रदेश में 5 मार्च तक गिरदावरी पूरी करवा दी जाएगी। इसके बाद ही राज्य सरकार पाला और शीत लहर से रबी फसल को हुए नुकसान के संबंध कोई घोषणा करेंगी।


गौरतलब है कि खरीफ सीजन में बेहतर पैदावार से खिले किसान मावठ नहीं होने से मायूस तो थे ही, जनवरी अंत व फरवरी के पहले सप्ताह में पाले ने फसल को नुकसान पहुंचाया है। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार तय लक्ष्य से करीब 30 फीसदी कम उत्पादन रहने की संभावना है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मावठ नहीं होने से प्रदेश में आगेती व खासकर सरसों व चना की उत्पादकता को प्रभावित किया है।


ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि संभावित पैदावार पर औसतन बीस फीसदी का प्रभाव पड़ेगा। वहीं पाला पडऩे से 10 फीसदी का अतिरिक्त नुकसान किसानों को होगा।


जिन फसलों में अभी बीज पड़ चुके है या फिर फूल आ रहे है उनको तेज ठंड व पाले से नुकसान पहुंचा है। कृषि भवन के सांख्यिकी विभाग के अनुसार फिलहाल संभावित नुकसान का सटीक आंकलन लगाना कठिन है। सबसे अधिक प्रभावित सरसों की फसल हुई है। इसका अनुमानित उत्पादन लक्ष्य 35.30 लाख टन रखा गया है।


जबकि पिछले सीजन में अग्रिम अनुमान ही 38.61 लाख टन रखा गया था। इस सीजन में चने की बंपर पैदावार की उम्मीद कर रहे किसानों की उम्मीदों पर भी मावठ की कमी कहर बन सकती है।


कृषि विभाग के मुख्य सांख्यिकी अधिकारी जी सी माथुर ने बताया कि रबी 2012 के उत्पादन अनुमान अग्रिम अनुमानों में बिजाई क्षेत्रफल घटने से कम रखे गए है। किसानों ने इस बार सरसों व सब्जियों की बिजाई में अधिक रुचि दर्शाई है। इस सीजन में गेहूं का उत्पादन अग्रिम अनुमानों के आधार पर 85,46,503 टन रहने का अनुमान है।


जौ का कुल उत्पादन 8,71,586 टन संभावित है। चना 14,75,811 टन व तारामीरा 1,97,097 टन रहने का अनुमान है। सबसे अधिक उत्पादन सरसों का रहेगा, इस रबी सीजन में सरसों का 35,30,586 टन उत्पादन राज्य में रहने की संभावना है

ताजा आवक में देरी से जौ वायदा में उछाल


बिजनेस भास्कर नई दिल्ली

जौ की ताजा आवक में देरी के कारण इसके वायदा अनुबंधों में तेजी रही। एनसीडीईएक्स पर जौ अप्रैल वायदा बुधवार को 4 फीसदी के अपर सर्किट को छूकर 1,551 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गया। कर्वी कॉमट्रेड के विश्लेषक अरविंद प्रसाद ने बताया कि आमतौर पर इन दिनों जौ की ताजा आवक शुरू हो जाती है। इसमें हो रही देरी के कारण वायदा कीमतों में तेजी दर्ज की गई।


बिनौला खली
उत्पादक क्षेत्रों में आवक अधिक होने के कारण बिनौला खली वायदा में गिरावट दर्ज की गई। एनसीडीईएक्स पर बुधवार को बिनौला खली मार्च वायदा 1.22 फीसदी गिरकर 1,214 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। बाजार के जानकारों के मुताबिक वर्तमान में गुजरात व महाराष्ट्र में बिनौला खली की अच्छी आवक दर्ज की जा रही है।


लाल मिर्च
मसाला उद्योग की ओर से मांग अच्छी होने के कारण बुधवार को लाल मिर्च वायदा में लगातार उछाल दर्ज किया गया।
एनसीडीईएक्स पर लाल मिर्च मार्च वायदा 4 फीसदी उछलकर 5,798 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। बाजार के जानकारों के अनुसार हाजिर बाजार में भाव अधिक होने से भी लाल मिर्च वायदा में तेजी दर्ज की जा रही है।


निकल
बुधवार शाम साढ़े पांच बजे तक एमसीएक्स पर निकल फरवरी अनुबंध 1.19 फीसदी बढ़कर 979.5 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया। शेअरखान
कमोडिटी के विश्लेषक प्रवीण सिंह ने बताया कि निवेशकों की सौदा खरीद के कारण निकल में तेजी दर्ज की गई है

बुधवार, 29 फ़रवरी 2012

जिंसों के निर्यात में अवरोध

चीनी के साथ-साथ अन्य कृषि जिंसों के निर्यात में कई तरह के अवरोध देखने को मिल रहे हैं। सरकार ने गेहूं निर्यात का कोटा हालांकि तय कर दिया है, लेकिन वास्तविक निर्यात में तेजी नहीं आ रही है। कॉफी का निर्यात भी कीमतों के चलते जोर नहीं पकड़ पा रहा है क्योंकि वैश्विक बाजार में भारत के मुकाबले कीमतें कम हैं और यूरोप में मंदी के चलते मांग पर असर पड़ा है। मक्के का निर्यात हुआ है, लेकिन इसकी गुणवत्ता को लेकर शिकायतें आ रही हैं और निर्यात बाजार में भारत की साख को धक्का पहुंचा है। वैश्विक बाजार में इफरात कपास और चीन की खरीदारी में कमजोरी के बावजूद इसका निर्यात हालांकि बेहतर रहा है।
देश में भारी भरकम भंडार के चलते पिछले साल के आखिर में 20 लाख टन गेहूं निर्यात की अनुमति दी गई थी, लेकिन वैश्विक बाजार मांग के मुकाबले ज्यादा आपूर्ति का सामना कर रहा है और कीमतें भी भारतीय निर्यात के अनुकूल नहीं है। भारत में सक्रिय वैश्विक स्तर पर जिंस का कारोबार करने वाले एक कारोबारी ने कहा कि अभी तक आधा निर्यात भी नहीं हो पाया है। अब तक महज 5 लाख टन गेहूं ही विदेश भेजा जा सका है। राबो बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में अपेक्षाकृत गेहूं की भरमार रही है और कीमतें भी कम रहने की संभावना है। भारत इसी तरह की स्थिति से जूझ रहा है और इस सीजन में गेहूं का उत्पादन काफी ज्यादा रहने की संभावना है और यह 880 लाख टन के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच सकती है।
चीनी के मामले में भी ऐसी ही स्थिति है क्योंकि ब्राजील की अगुआई में वैश्विक स्तर पर इफरात चीनी उपलब्ध है। अभी भी हालांकि निर्यात हो रहा है और यहां से जल्द ही 10 लाख टन चीनी निर्यात का कोटा पूरा हो जाएगा। हालांकि 10 लाख टन और चीनी निर्यात की अनुमति का इंतजार किया जा रहा है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि वे इसलिए निर्यात करना चाहते हैं कि अगले सीजन में उनके पास चीनी न रहे। पिछले कुछ दिनों में चीनी की कीमतें सुधरी हैं और लंदन के बाजार में यह 665 डॉलर पर बिक रही है।
मक्के के मामले में भारत का निर्यात अब तक 10 लाख टन को पार कर चुका है और यह मार्च तक 27 लाख टन को पार कर सकता है क्योंकि वैश्विक बाजार में कीमतें ज्यादा हैं। इस साल देश में 216 लाख टन मक्के का उत्पादन हो सकता है। लेकिन गुणवत्ता के मामले में भारत की छवि को धक्का लगा है।
अमेरिकी अनाज परिषद के अमित सचदेव ने कहा - भारत से अभी भी निर्यात हो रहा है, लेकिन रिपोर्ट से पता चलता है कि मक्के की कुछ खेपों में गुणवत्ता संबंधी सवाल उठ खड़े हुए हैं और इस वजह से कुछ समय तक इसकी कीमतें नरम रह सकती है। खबर है कि वियतनाम भेजी गई मक्के की खेप में ज्यादा नमी और टूटे हुए मक्के मिले हैं। निर्यात की कुछ खेप अस्वीकार भी की जा सकती है।
वैश्विक बाजार में इफरात कपास होने के बावजूद पिछले कुछ दिनों में कपास निर्यात के पंजीकरण में अचानक तेजी आ गई है। अंतरराष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति के मुताबिक, साल 2011-12 में कपास का वैश्विक उत्पादन 7 फीसदी बढ़कर 268 लाख टन रहने का अनुमान है। पिछले पांच साल में उत्पादन का यह सर्वोच्च स्तर होगा। किसानों को इस सीजन में कम कीमत मिलने के चलते हालांकि साल 2012-13 में उत्पादन घटकर 249 लाख पर आ जाने की संभावना है। देश में कपास की कीमतें घट रही हैं और अब यह एक पखवाड़े पहले की कीमत के मुकाबले 10 फीसदी सस्ता है। भाईदास खरसोनदास ऐंड कंपनी के शिरीष शाह ने कहा - अब तक 70 लाख गांठ कपास के निर्यात की खबर है और बताया जा रहा है कि डीजीएफटी के पास पंजीकरण 1 करोड़ गांठ को पार कर गया है। बासमती चावल के न्यूनतम निर्यात मूल्य में कमी किए जाने के बाद इसके निर्यात में तेजी आने की संभावना है। 23 फरवरी को सरकार ने इसकी एमईपी 900 डॉलर प्रति टन से घटाकर 700 डॉलर प्रति टन करने की अधिसूचना जारी कर दी है

ग्वार गम पहुंच गया 60 हजार के पार

वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) की कोशिशों को मुंह चिढ़ाते हुए ग्वार गम का भाव निर्यात के झोंके से आज 60,000 रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंच गया। इसके सभी वायदा सौदे आज अपर सर्किट में फंसे रहे, लेकिन विदेश से जबरदस्त मांग को देखते हुए कीमतों में कमी फिलहाल संभव नहीं दिख रही।
पिछले एक साल में ग्वार गम की कीमत 625 फीसदी और ग्वार सीड के दाम 550 फीसदी चढ़ चुके हैं।
नैशनल कमोडिटी ऐंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स) में आज इन पर 4 फीसदी का अपर सर्किट भी लगा। फिर भी ग्वार गम का अप्रैल अनुबंध 60,458 रुपये प्रति क्विंटल पर और गवार सीड 18,700 रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंच गया।
ग्वार की सबसे बड़ी मंडी जयपुर में भी ग्वार गम की कीमत 60,000 रुपये को छू गई। यह आलम तब है, जब एफएमसी इस पर मार्जिन बढ़ा चुका है और खरीदारी की सीमा कम कर चुका है। कुछ कारोबारियों को वायदा कारोबार से बाहर भी कर दिया गया है, लेकिन ग्वार थमने का नाम नहीं ले रहा। ग्वार की कीमत असल में निर्यात मांग पर बढ़ रही हैं। अप्रैल-नवंबर 2010 में 2.28 लाख टन ग्वार गम का निर्यात हुआ था, जो आंकड़ा अप्रैल-नवंबर 2011 में 194 फीसदी बढ़कर 6.7 लाख टन पर पहुंच गया। कीमतें बढऩे के कारण पिछले वित्त वर्ष के शुरुआती 8 महीनों में 6,24,877 लाख रुपये के ग्वार गम का निर्यात हुआ, जो रकम अप्रैल-नवंबर 2010 के मुकाबले 331 फीसदी अधिक रही।
ऐंजल कमोडिटी की वेदिका नार्वेकर कहती हैं कि नवंबर महीने में ही 3.3 लाख टन ग्वार गम का निर्यात हुआ और तभी से उसकी कीमतें दौडऩे लगीं। उन्होंने कहा कि इस साल उत्पादन घटने की आशंका है और विदेशी मांग बढ़ रही है, इसलिए कीमत काबू में आना मुश्किल है। सरकारी अनुमान के मुताबिक ग्वार के सबसे बड़े उत्पादक राजस्थान में पिछले साल के 15 लाख टन के बजाय इस बार 12.09 लाख टन उत्पादन ही होगा। पिछले साल का स्टॉक भी 1.5-2 लाख टन है, जो आम तौर पर 4-4.5 लाख टन रहता है। ऐसे में ग्वार की कीमत अभी 70-80 फीसदी और बढ़ सकती है

एग्री उत्पादों के निर्यात में 72 फीसदी की बढ़ोतरी

पिछले साल की समान अवधि में हुआ था 24,103 करोड़ रुपये का निर्यात
इनमें वृद्धि ज्यादा
ग्वार गम और मूंगफली दाने के निर्यात में हुई ज्यादा बढ़ोतरी
ग्वार गम का निर्यात 331 फीसदी बढ़कर 6.70 लाख टन हुआ
मूंगफली दाने का निर्यात 154.64 फीसदी बढ़कर 4.52 लाख टन


ग्वार गम और मूंगफली दाने के निर्यात में हुई भारी बढ़ोतरी से चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में एग्री उत्पादों का निर्यात 71.91 फीसदी बढ़ा है। प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के तहत पंजीकृत होने वाले एग्री उत्पादों का चालू वित्त वर्ष 2011-12 के अप्रैल से नवंबर के दौरान 41,438.27 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ है। जबकि पिछले साल की समान अवधि में 24,103.76 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था।
एपीडा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अमेरिका के साथ-साथ खाड़ी देशों और यूरोप की मांग से चालू वित्त वर्ष में ग्वार गम के निर्यात में भारी बढ़ोतरी हुई है।


वित्त वर्ष 2011-12 के अप्रैल से नवंबर के दौरान ग्वार गम का निर्यात 331 फीसदी बढ़कर 6.70 लाख टन का हुआ है। जबकि पिछले साल की समान अवधि में 2.28 लाख टन का निर्यात हुआ था। मूल्य के हिसाब से इस दौरान ग्वार गम का 6,248.76 करोड़़ रुपये का निर्यात हो चुका है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1,449.49 करोड़ रुपये का ही निर्यात हुआ था।


इसी तरह से मूंगफली दाने के निर्यात में चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में 154.64 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल 4.52 लाख टन का निर्यात हो चुका है। जबकि पिछले साल की समान अवधि में 2.39 लाख टन का ही निर्यात हुआ था। मूल्य के हिसाब से मूंगफली दाने का निर्यात अप्रैल से नवंबर के दौरान 3,000.70 करोड़ रुपये का हो चुका है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1,178.39 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था।


उन्होंने बताया कि फल एवं सब्जियों के बीजों का निर्यात चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में 5,650.12 टन से बढ़कर 50,704.81 टन का निर्यात हुआ है।


मात्रा के हिसाब से इनका निर्यात पिछले साल के 111.91 करोड़ रुपये से बढ़कर 156.38 करोड़ रुपये का हो गया। बासमती चावल का निर्यात पिछले साल के 13.60 लाख टन से बढकर 17.61 लाख टन हो गया। जबकि गैर-बासमती चावल का निर्यात इस दौरान बढ़कर 12.36 लाख टन का हो गया।


उन्होंने बताया कि सरकार ने गेहूं और गैर-बासमती चावल के निर्यात पर लगी हुई रोक को हटाया हुआ है। इसलिए आगामी महीनों में इनके निर्यात में अच्छी बढ़ोतरी की संभावना है। मक्का के निर्यात में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में मोटे अनाजों का निर्यात मूल्य के हिसाब से बढ़कर 2,881.96 करोड़़ रुपये का हो गया जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1,490.33 करोड रुपये का निर्यात हुआ था

कोऑपरेटिव सोसाइटियों को वायदा कारोबार की अनुमति

बिजनेस भास्कर नई दिल्ली

वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) ने कोऑपरेटिव सोसाइटियों को जिंस वायदा कारोबार करने की अनुमति दे दी है। इससे जहां जिंस वायदा कारोबार में किसानों की भागीदारी बढऩे की संभावना है वहीं जिंस वायदा के कारोबार में भी बढ़ोतरी होगी।


एफएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कोऑपरेटिव सोसाइटियां किसानों से जुड़ी संस्थाएं है, इसीलिए आयोग ने कोऑपरेटिव सोसाइटियों को जिंस वायदा बाजार में भाग लेने और अधिकृत व्यक्ति के रूप में कार्य करने की अनुमति दी है।


इससे जिंस वायदा कारोबार में किसानों की भागीदारी बढ़ेगी। साथ ही किसान इसके माध्यम से अपनी फसलों के उचित मूल्य पाने में भी सफल हो सकेंगे। उन्होंने बताया कि जिंस वायदा में किसी भी जिंस में तीन-चार माह आगे के सौदे होते हैं। इससे किसानों को यह जानने में आसानी होगी कि तीन-चार माह बाद उन्हें जिंस का क्या मूल्य मिलने की उम्मीद है और इसका रुख किस ओर है।


उन्होंने बताया कि जिंस वायदा का कारोबार तो बढ़ रहा है तथा इसमें निवेशकों की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है लेकिन किसानों की भागीदारी अभी भी ना के बराबर है।


जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में किसान कोऑपरेटिव सोसाइटियों से जुड़े हुए हैं। कोऑपरेटिव सोसाइटियों के जिंस वायदा में कारोबार शुरू करने से बाजार की व्यापकता बढ़ जाएगी। वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) के अनुसार चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से जनवरी के दौरान जिंस वायदा के कारोबार में 61 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल कारोबार 151 लाख करोड़ रुपये का हुआ है

सरसों उत्पादन में 8% गिरावट का अनुमान

आशंका
सरसों का उत्पादन घटकर 63 लाख टन रह जाने का अंदेशा
कृषि मंत्रालय के दूसरे अनुमान से भी कम रहेगा सरसों उत्पादन
बुवाई क्षेत्रफल व खराब मौसम से उत्पादन में गिरावट की आशंका

खराब मौसम व फसल के बुवाई क्षेत्रफल में कमी के कारण चालू सीजन में सरसों का उत्पादन 8 फीसदी तक कम रहने का अनुमान है। औद्योगिक निकाय सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) के मुताबिक सरसों का उत्पादन 8 फीसदी गिरकर 63 लाख टन रह जाने की संभावना है।


एसईए का यह अनुमान समान अवधि के लिए जारी किए गए सरकारी अनुमान से कम है। कृषि मंत्रालय के दूसरे अनुमानित आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2011 से शुरू हुए रबी सीजन 2011-12 में सरसों का उत्पादन 75 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया है।


एसईए के अनुसार सरसों की फसल का बुवाई क्षेत्रफल 6.64 लाख हैक्टेयर कम रहा है जबकि उत्पादन 5.85 लाख टन कम रहने का अनुमान है।
एसईए के मुताबिक बुवाई क्षेत्रफल में कमी के साथ ठंड के कारण खराब हुई फसल से इसका कुल उत्पादन गिरकर 63 लाख टन रह जाने की संभावना है।


पिछले साल सरसों का उत्पादन 68.5 लाख टन रहा था। एसईए के अनुसार बुवाई में देरी और दिसंबर में उच्च तापमान के कारण सरसों की फसल पहले ही 15-20 दिन लेट है। साथ ही अधिक ठंड से गुजरात व पश्चिमी राजस्थान के कुछ भागों में सरसों की खड़ी फसल को हुए नुकसान से उत्पादन में कमी की आशंका है।


एसईए के आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश में सरसों का उत्पादन 2.40 लाख टन कम रहने की संभावना है। पिछले साल यह 3.30 लाख टन दर्ज किया गया था। हरियाणा में पिछले साल के 7.7 लाख टन की तुलना में सरसों का उत्पादन 6.20 लाख टन रहने का अनुमान है। गुजरात में भी उत्पादन 3.30 लाख टन से गिरकर 2.40 लाख टन रह जाने का अनुमान है। हालांकि उत्तरप्रदेश व पश्चिम बंगाल में उत्पादन बढऩे की संभावना है

फसल नुकसान की गिरदावरी पांच तक

विधान सभा के बजट सत्र के दूसरे दिन हंगामा

पाले व शीतलहर से फसलों के खराबे का आकलन करने के लिए राज्य सरकार ने 5 मार्च तक गिरदावरी पूरी कराने का भरोसा दिलाया है। वहीं पाले व शीतलहर से फसलों को नुकसान का मुद्दा उठाते हुए विपक्ष ने विधान सभा के बजट सत्र के दूसरे दिन हंगामा और नारेबाजी की।


इसके चलते संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने विपक्षी सदस्यों को आश्वस्त किया कि प्रदेश में पाला व शीत लहर से रबी फसल को हुए नुकसान के संबंध में सरकार वक्तव्य देने को तैयार है।


उल्लेखनीय है कि रबी सीजन के दौरान प्रदेश के कई इलाकों में पाले व शीतलहर से तीस फीसदी से ज्यादा फसल पर असर पडऩे की संभावना है। इस कारण सोमवार को राजस्थान किसान आयोग की पहली बैठक में भी सरकार को किसानों को मुआवजे की सिफारिश करने का फैसला किया गया था। किसान संगठन भी लगातार मुआवजे की मांग कर रहे हैं।


इससे पहले आपदा राहत राज्यमंत्री बृजेंद्र ओला ने बताया कि राज्य सरकार पाला व शीतलहर को आपदा की सूची में शामिल कराने को प्रयत्नशील है। इसके लिए मुख्यमंत्री सहित अन्य स्तरों पर केंद्र सरकार को पत्र लिखा गया है। राष्ट्रपति की मौजूदगी में दिल्ली में हुई मुख्यमंत्रियों की बैठक में भी गहलोत ने यह मांग उठाई थी।


उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने इस संबंध में मंत्रियों का समूह बनाया था। इस बारे में कृषि विशेषज्ञों के गठित कार्यकारी समूह ने अपनी रिपोर्ट मंत्रियों के समूह को सौंप दी है। राज्य सरकार को उम्मीद है कि केंद्रीय मंत्रियों का समूह पाला व शीतलहर को आपदा की सूची में शामिल करने पर सकारात्मक निर्णय लेगी। राज्य सरकार प्रदेश में एक फरवरी से 5 मार्च तक गिरदावरी करा रही है

आवक में तेजी के कारण कपास वायदा में गिरावट

आवक का सीजन होने के कारण कपास वायदा में गिरावट दर्ज की गई। एनसीडीईएक्स पर मंगलवार को कपास फरवरी वायदा 2.9 फीसदी गिरकर 757 रुपये प्रति 20 किलो हो गया। कर्वी कॉमट्रेड के विश्लेषक अरविंद प्रसाद ने बताया कि चीन की ओर से कपास की निर्यात मांग निकलने का अनुमान लगाया जा रहा है इससे अगले कुछ दिनों में इसकी कीमतों में सुधार दर्ज किया जा सकता है।


इलायची
हाजिर बाजार में आवक में कमी के कारण इलायची वायदा में तेजी दर्ज की गई। एमसीएक्स पर मंगलवार को शाम पांच बजे तक इलायची मार्च


वायदा
3.81 फीसदी उछलकर 959.80 रुपये प्रति किलोग्राम रहा। बाजार के जानकरों का कहना है कि कनफेक्शनरी में मांग बढऩे से इलायची वायदा तेज रहा। उत्पादक क्षेत्रों में इन दिनों फसल के लिए जरूरी बारिश नहीं होने से भी कीमतों में तेजी को समर्थन मिल रहा है।


लाल मिर्च
आवक में कमी के कारण लाल मिर्च वायदा में उछाल दर्ज किया गया। एनसीडीईएक्स पर लाल मिर्च मार्च वायदा 4 फीसदी उछलकर 5,574 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। बाजार के जानकारों के मुताबिक लाल मिर्च की आवक में करीब 30 फीसदी की गिरावट आई है इससे इसकी वायदा कीमतों में तेजी दर्ज की गई।



ग्वार सीड
निर्यात मांग में तेजी के कारण ग्वार सीड वायदा में तेजी रही। मंगलवार को एनसीडीईएक्स पर ग्वार सीड मार्च वायदा 4 फीसदी बढ़कर 18,782 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। बाजार के जानकारों का कहना है कि एपीडा की ओर से जारी किए गए ग्वार सीड के निर्यात आंकड़े अधिक होने के कारण ग्वार सीड वायदा में तेजी दर्ज की गई

मंगलवार, 28 फ़रवरी 2012

...तो अब कई गुना बढ़ जाएगी गेहूं की पैदावार!

लंदन ।। ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने गेहूं के जेनेटिक कोड का पता लगाया है जो आकार की दृष्टि से मानव जीनोम की तुलना में पांच गुना ज्यादा बड़ा है। वैज्ञानिकों ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए इस बात का दावा किया है कि इससे विश्व में खाद्य आपूर्ति को आसान बनाने और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों को स्थिर करने में मदद मिलेगी।

ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की टीम का कहना है कि इस जीनोम सिक्वेंस की मदद से गेहूं की नई किस्म भी विकसित की जा सकेगी जिन पर विभिन्न प्रकार की बीमारियों और विषम परिस्थितियों का भी कोई असर नहीं होगा और उनसे पैदावार भी ज्यादा होगी।

जैसा कि हम सब इस बात से वाकिफ हैं कि गेहूं दुनिया की सबसे अहम फसलों में से एक है और पूरे विश्व में इसकी सालाना पैदावार 55 करोड़ टन से भी ज्यादा है। बहरहाल, 'द डेली टेलीग्राफ' की रिपोर्ट के मुताबिक इस नए जीनोम डेटा की मदद से गेहूं की सभी प्रकार की जीनों में से 95 प्रतिशत के बारे में अहम जानकारी हासिल हो सकती है।

यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के साइंटिस्ट प्रोफेसर कीथ एडवार्ड्स ने कहा कि गेहूं के जीनोम के आकार और इसकी जटिलता ने वैज्ञानिकों के काम को और चुनौतीपूर्ण बना दिया। उन्होंने कहा कि इस जीनोम के बारे में पूरी जानकारी जुटाने की दिशा में अभी भी बहुत काम करना बाकी है। हालांकि यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल के साइंटिस्ट डॉक्टर एंथनी हाल ने अनुमान व्यक्त किया कि अगले 40 बरसों में विश्व में खाद्यान्नों की पैदावार 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की जरूरत होगी।

घटती मांग से कपास में बढ़त की संभावना कम


विदेशी बाजारों में मांग और दाम कमजोर रहने तथा देसी धागा मिलों की हल्की खरीदारी से कपास की कीमतें लगातार गिर रही हैं। महीने भर के भीतर हाजिर और वायदा बाजार में इसके भाव 10 फीसदी लुढ़क चुके हैं। हाजिर बाजार में ग्राहक नहीं होने पर किसान सस्ते में माल बेच रहे हैं और वायदा बाजार में बिकवाली की वजह से कपास और कॉटनसीड लोअर सर्किट में फंसे हैं।
मंद मांग के बीच कपास (शंकर-6) का हाजिर भाव महीने भर में 37,100 रुपये से लुढ़कर 34,000 रुपये प्रति कैंडी के नीचे चले गए हैं। वायदा में आज एनसीडीईएक्स पर कपास और कॉटन के सभी अनुबंधों पर 4 फीसदी गिरावट के साथ लोअर सर्किट लगा। दरअसल विदेशी बाजार में कीमत गिर गई हैं और पिछले साल के उतारचढ़ाव झेल चुकी देसी कंपनियां भी ज्यादा खरीदारी नहीं कर रही हैं। वायदा बाजार में एक्सपायरी की तारीख नजदीक होने के कारण निवेशक माल जल्दबाजी में माल बेच रहे हैं।
कोटक कमोडिटी की उपाध्यक्ष प्रेरणा देसाई के मुताबिक यूरोप और चीन से कमजोर मांग का असर देश में भी पड़ रहा है। रुई का वायदा अनुबंध भी अप्रैल तक ही है, जिस कारण निवेशक माल निकालने में जल्दबाजी दिखा रहे हैं और रुई में लोअर सर्किट लग रहा है।
उधर धागा मिल मालिकों का कहना है कि उनके गोदाम भरे पड़े हैं, इसलिए वे माल नहीं खरीद रहे, जबकि माल की आपूर्ति खूब हो रही है। मंडियों में सूत्रों ने बताया कि उत्तर भारत की प्रमुख मंडियों में रोजाना करीब 30,000 गांठ (1 गांठ में 170 किलोग्राम कपाास), गुजरात में 64,000 और महाराष्ट्र की मंडियों में 4,000 गांठ कपास की आवक हो रही है। धागा मिलों के लिए कपास खरीदने वाले विशाल ने बताया कि मिल मालिक पहले 6 महीने का माल गोदाम में रखते थे, लेकिन पिछली बार कीमतों के उतार चढ़ाव में पिटने के बाद अब वे 3 महीने का माल रखते हैं।
कृषि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार इस बार 30.87 लाख गांठ कपास उत्पादन की संभावना है, जो पिछले वर्ष 330 लाख गांठ था। कपास सलाहकार बोर्ड के मुताबिक इस बार 345 लाख टन कपास होगा, जबकि देसी मांग 250-260 लाख गांठ ही होगी।

नवीन कृषि तकनीक के लिए मेलों की अहम भूमिका : जोशी


जयपुर,: केन्द्रीय भूतल सड़क एवं परिवहन मंत्री डॉ.सी.पी.जोशी ने किसानों से कहा है कि कृषि के क्षेत्र में कम जोत एवं कम पानी से अधिक उत्पादन कैसे प्राप्त किया जाए इसके लिए शिक्षा के साथ नवीन कृषि तकनीक को अपनाना होगा और इन जानकारियों के लिए कृषि मेलों की अहम भूमिका है। डॉ.जोशी शनिवार को राजसमन्द जिले की खमनोर पंचायत समिति परिसर में कृषि प्रौद्योगिकी प्रबन्ध अभिकरण (आत्मा) एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित जिला स्तरीय किसान मेला एवं प्रदर्शनी कार्यक्रम में जिले की सातो पंचायत समितियों से काश्तकारों को मुख्य अतिथि पद से सम्बोधित कर रहे थे।उन्होंने कहा कि आजादी के बाद कृषि क्षेत्र में भी काफी बदलाव आया है। पंजाब और जैसलमेर जैसे स्थानों पर कृषि की स्थिति अलग हो सकती है लेकिन कम जोत एवं कम पानी में अधिक उत्पादन लेना शिक्षा एवं कृषि की नवीन तकनीक से ही संभव है। उन्होंने कहा कि गांव के गरीब की माली हालत को बदलने के लिए वे अपने बालकों को पढाएं। जब तक शिक्षा एवं जानकारी नहीं होगी तब तक कृषि क्षेत्र में उत्पादन प्रभावित रहता है।इस अवसर पर कृषि विभाग के अलावा महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्व विद्यालय उदयपुर, फल फूल औषधि, पौली हाउस तकनीक, दुग्ध सरिता प्रोजेक्ट राजसमन्द डेयरी, श्रीनाथ मसूली फार्म काछबली भीम, पशुपालन, आईसीडीएस, समाज कल्याण, सहकारिता विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सहित विभिन्न 28 स्टाले स्थापित थी। जिसका मुख्य अतिथि डॉ.सी.पी.जोशी ने अवलोकन किया

यूरिया मूल्यों को नियंत्रणमुक्त करने की जरूरत..रंगराजन



प्रधानमंत्रीकी आर्थिक सलाहकार परिषद ने डीजल मूल्यों को धीरे-धीरे बढ़ाने और इन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार के स्तर पर रखने का सुझाव दिया है। परिषद ने उत्पाद एवं सेवा शुल्क दरों को वित्तीय संकट से पहले के स्तर पर लाने का भी सुझाव दिया है। परिषद के अध्यक्ष डा. सी. रंगराजन ने बुधवार को अर्थव्यवस्था की समीक्षा 2011-12 जारी करते हुए यूरिया मूल्यों को भी नियंत्रणमुक्त किए जाने पर जोर दिया। रंगराजन ने एक सवाल पर कहा कि अगले वित्त वर्ष में डीजल मूल्यों में चरणबद्ध ढंग से समायोजन किए जाने की आवश्यकता है। पिछले लंबे समय से इसमें कुछ नहीं हुआ है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम काफी बढ़ गए ऐसे में हमारे लिए इस क्षेत्र को एक सीमा से आगे सब्सिडी देते रहना संभव नहीं है। चालू वित्त वर्ष के दौरान राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद [जीडीपी] के 4.6 प्रतिशत के बजट अनुमान से काफी ऊपर जाने की आशंका है। रंगराजन ने कहा कि सब्सिडी वितरण में सुधार लाने के साथ-साथ इस पर अंकुश लगाना चाहिए। रंगराजन ने कहा कि उत्पाद शुल्क और सेवाकर दरों को वित्तीय संकट से पूर्व की स्थिति में लाया जाना चाहिए। ऐसा होता है तो उत्पाद एवं सेवाकर की दरें मौजूदा 10 प्रतिशत से बढ़कर 12 प्रतिशत करनी होगी। इससे सरकार को 32,000 से 35,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। सरकार ने 2008-09 में वैश्विक वित्तीय संकट के समय अप्रत्यक्ष करों की दर कम कर दी थी, ताकि घरेलू उद्योग व्यापार को बाहर के संकट के प्रभावों से बचाया जा सके

जयपुर मंडियों में ग्वारगम व सरसों में उछाल


बिजनेस भास्कर

जयपुर चालू माह के अंतिम सप्ताह के पहले दिन ग्वार में उछाल जारी रहा। आज ग्वार कीमतों में 1500 रुपये प्रति क्विंटल तक की तेजी रही। वहीं चना में तेजी का रुख रहा। लगातार तेजी के सर्किट की बदौलत आज जयपुर मंडी में ग्वार अपने अब तक के उच्चतम स्तर 57500 रुपये प्रति क्विंटल बोला गया।


गेहूं कीमतों में पिछले सप्ताहभर से जारी तेजी सोमवार को भी बनी रही। सरसों कीमतों में आज तेजी का दौर रहा। कीमतों में अन्य दिनों के मुकाबले उछाल रहा। जयपुर सहित प्रदेश की अन्य मंडियों में चना कीमतों में भरी गिरावट देखी गई। पिछले एक पखवाड़े से जारी कपास की कीमतें आज थमी। हालांकि कपास नरमा में आंशिक तेजी देखी गई।


ग्वार जयपुर मंडी में तेजी रही। अलवर, श्रीगंगानगर व भरतपुर मंडी में कीमतों में 500 रुपये प्रति क्विंटल तक की तेजी रही। चने में आज मंदा रहा। दाल कीमतों में गिरावट देखी रही। किराना कीमतों में मांग दबाव कम रहा। हल्दी में कोई खासा उतार चढ़ाव नहीं रहा। धनिया की कीमतों पर आज भी मंदी रही। जयपुर मंडी में सरसों में 42 प्रतिशत में 35 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी रही। अलवर में 20 रुपये की तेजी रही।


भरतपुर व श्रीगंगानगर में 25 रुपये प्रति क्विंटल का उछाल देखा गया। जयपुर मंडी में ग्वार कीमतों में आज फिर तेजी रही। ग्वार जयपुर लाइन में 400 रुपये, बीकानेर लाइन में 500 रुपये व ग्वारगम जोधपुर में 800 रुपये प्रति क्विंटल का उछाल रहा। अलवर में ग्वार लूज 550 रुपये प्रति क्विंटल उछाल रहा। श्रीगंगानगर मंडी में ग्वार ढेरी में 450 रुपये व जोधपुर में 600 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी रही। (ब्यूरो

भारत से 61 लाख टन चावल निर्यात की संभावना

बिजनेस भास्कर

इंटरनेशनल ग्रेन्स काउंसिल (आईजीसी) ने चालू वर्ष 2012 के दौरान भारत से ज्यादा चावल निर्यात होने की उम्मीद जताई है। उसके अनुसार भारत से 61 लाख टन चावल का निर्यात हो सकता है। पहले 50 लाख टन चावल निर्यात होने की गुंजाइश बताई थी।


आईजीसी ने एक रिपोर्ट में कहा कि भारत से चावल निर्यात के बारे में यह अनुमान इसके आधार पर लगाया है कि सरकार गैर बासमती चावल का निर्यात चालू वर्ष में भी जारी रखेगी। सरकार ने घरेलू खपत से ज्यादा उत्पादन होने की संभावना के चलते सितंबर 2011 में चावल निर्यात की अनुमति दी थी।


पिछले माह आईजीसी ने दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चावल उत्पादक देश भारत से 50 लाख टन चावल के निर्यात की संभावना जताई थी। पिछले साल 2011 के दौरान भारत से कुल 41 लाख टन चावल का निर्यात किया गया था। चालू फसल वर्ष 2011-12 (जुलाई-जून) के दौरान 1027.5 लाख टन चावल का उत्पादन होने का अनुमान है।


सरकार ने बासमती चावल के निर्यात के लिए न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) को घटाकर 700 डॉलर प्रति टन तय किया है। चावल निर्यात के मामले में आईजीसी ने भारत व पाकिस्तान को छोड़कर बाकी सभी देशों से सप्लाई घटने का अनुमान जताया है। चावल निर्यात में कमी की संभावना वाले देशों में थाईलैंड, वियतनाम और अमेरिका शामिल हैं।


रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012 में थाईलैंड का चावल निर्यात 106 लाख टन से घटकर 67 लाख टन रहने का अनुमान है। वियतनाम का निर्यात 71 लाख टन से घटकर 64 लाख टन रह सकता है।


इसी तरह अमेरिका से निर्यात 33 लाख टन से घटकर 30 लाख टन रहने की संभावना है। आईजीसी के अनुसार वैश्विक स्तर पर चावल का आयात सात फीसदी घटकर 322 लाख टन रह सकता है। बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे एशियाई देशों की खरीद में कमी आ सकती है

सोमवार, 27 फ़रवरी 2012

धारा 90ए का प्रस्ताव विस के इसी सत्र में

बिजनेस भास्कर जयपुर

शहरी क्षेत्रों में जमीनों की किस्म परिवर्तन के लिए भू-राजस्व कानून में संशोधन विधेयक विधानसभा के इसी सत्र में पेश किया जाएगा। इस संशोधन के जरिए धारा 90बी को खत्म करके धारा 90ए का प्रावधान किया जाएगा। गौरतलब है कि राज्य मंत्रिमंडल इस फैसले पर पहले ही मुहर लगा चुकी है।


नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने बताया कि इनके साथ ही 6 अन्य अध्यादेश के संशोधन विधेयक भी इसी सत्र में पेश किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि धारा 90बी को खत्म करने की घोषणा कांग्रेस ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में की थी।
कांग्रेस विधायक दल की बैठक 28 फरवरी को सुबह 10 बजे विधानसभा परिसर में बुलाई गई है। सरकारी मुख्य सचेतक रघु शर्मा ने बताया कि बैठक में बजट सत्र के दौरान सदन में फ्लोर मैनेजमेंट पर चर्चा की जाएगी।


गौरतलब है कि लोगों की सुविधा के लिए कुछ बदलाव नए नियमों में किए गए है। नए नियमों के तहत अब लैंड यूज कन्वर्जन के एक ही स्थान पर आवेदन करना होगा। इससे पहले तीन अलग अलग स्थानों से इसके लिए मंजूरी आवश्यक थी। साथ ही भूमि उपयोग परिवर्तन मास्टर प्लान व सेक्टर प्लान को ध्यान में रखकर करना होगा।


इससे भविष्य में विकसित होने वाले क्षेत्रों में किसी समस्या का सामना नहीं करना होगा। साथ ही पारदर्शिता लाने के लिए लैंड यूज कन्वर्जन वाली भूमि का विभाग अपने ऑनलाइन पोर्टल पर भी प्रदर्शित करेगा। मास्टर प्लान व सेक्टर प्लान में चिन्हित भूमि का ही नए नियमों के तहत भूमि उपयोग परिवर्तन किया जा सकेगा

निर्यात ऑर्डर बढऩे से कॉटन यार्न के दाम सुधरे

बिजनेस भास्कर नई दिल्ली

कारोबार में बेहतरी
रुपये की कमजोरी से निर्यात के ऑर्डरों में भारी बढ़ोतरी
यार्न मिलों के पास एक-डेढ़ माह के लिए ऑर्डर उपलब्ध
नए निर्यात ऑर्डरों के चलते मिलों का बकाया स्टॉक घटा
मिलों के पास सिर्फ 15-20 दिन का कॉटन यार्न स्टॉक

एक माह में 30 काउंट यार्न 15 रुपये बढ़कर 166-177 रुपये प्रति किलो हो गया

एक ओर जहां गारमेंट कंपनियां उत्पादन कम करने की योजना बना रही हैं, वहीं मध्य प्रदेश की कॉटन यार्न कंपनियां उत्पादन बढ़ाने की तैयारी कर रही है। तेजी से बढ़ रहे निर्यात आर्डरों ने कंपनियों को बड़ा सहारा दिया है। इससे कंपनियों के पास एकत्रित दो महीने तक का स्टॉक कम होकर सामान्य स्तर पर आ गया है।


कुछ महीनों पहले घरेलू यार्न निर्माताओं को आर्डरों में भारी कमी के चलते काफी स्टॉक एकत्रित हो गया था। प्रदेश की सभी कंपनियों के पास 45-60 दिन का स्टॉक जमा हो गया था। हालात इतने खराब थे कि कंपनियों द्वारा उत्पादन में कमी करने के बाद भी स्टॉक बढ़ता जा रहा था। लेकिन नवंबर-जनवरी के दौरान रुपये की कमजोरी ने उनके पास निर्यात ऑर्डरों की नई लहर ला दी।


प्रदेश की सभी कंपनियों के पास आगे एक से डेढ़ महीनों के लिए ऑर्डर हैं। इन निर्यात आर्डरों के चलते कंपनियों को स्टॉक कम करने में काफी मदद मिली है। कंपनियों के पास यार्न का स्टॉक घटकर 15-20 दिन का रह गया है। कंपनियों को ऑर्डर तो और ज्यादा मिल रहे है किंतु पिछले साल से सबक लेते हुए कंपनियां लंबी अवधि के ऑर्डर नहीं ले रही हैं।


मध्य प्रदेश टेक्सटाइल मिल एसोसिएशन के वाइस चेयरमैन टी. के. बल्दुआ ने बिजनेस भास्कर को बताया कि कंपनियों के पास फिलहाल ऑर्डरों की कोई कमी नहीं है। यूरोपीय देश और चीन की ओर से काफी ऑर्डर आ रहे है किंतु आगे कपास की कीमतों का क्या रुख रहेगा और रुपया किस ओर जाएगा, इसको लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। पिछले साल कंपनियों को कपास की खरीद में काफी नुकसान हुआ था, इसको देखते हुए कंपनियां लंबी अवधि के ऑर्डर नहीं ले रही है।


ऑर्डर बढऩे और कपास के दाम में नरमी से कंपनियों के मार्जिन भी बेहतर हो गए हैं। कपास के दाम में आई नरमी और यार्न के दामों में बढ़ोतरी से कंपनियों को मार्जिन अच्छे मिल रहे है। प्रतिभा सिंटेक्स के कार्यकारी निदेशक श्रेयस्कर बंसल कहते है कि कॉटन यार्न निर्माताओं की स्थिति काफी बेहतर हो गई है। कपास के दामों में हाल की गिरावट ने काफी सहारा दिया है। इसके अलावा बढ़ते ऑर्डरों की वजह से कंपनियों ने कॉटन यार्न के दाम भी बढ़ा दिए है। इससे निर्यात में मार्जिन बढ़ गए है। पिछले एक महीनों के दौरान 30 काउंट कॉटन यार्न के दाम 15 रुपये बढ़कर 166-177 रुपये प्रति किलो पहुंच गये हैं।


इसी दौरान कपास के दाम 36,500 रुपये से घटकर 33,000 रुपये प्रति कैंडी (प्रति कैंडी 356 किलो) रह गये हैं।
मध्य प्रदेश से वित्त वर्ष 2010-11 के दौरान कुल 1800 करोड़ रुपये के टेक्सटाइल उत्पादों का निर्यात हुआ था। इसमें से करीब 1020 करोड़ रुपये का यार्न निर्यात था। इसके अलावा 314 करोड़ रुपये का विस्कोस फाइबर, 300 करोड़ रुपये निटेड गारमेंट, 115 करोड़ रुपये निटेड फैब्रिक शामिल थे।

गेहूं खरीद के लिए नौ लाख जूट बैगों की खरीद होगी

बिजनेस भास्कर नई दिल्ली

रबी विपणन सीजन 2012-13 में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्य सरकार की एजेंसियों को गेहूं की खरीद के लिए कुल 12.30 लाख बैग की आवश्यकता होगी। चूंकि पंजाब के पास तीन लाख और हरियाणा के पास 20 हजार बैग पहले से ही उपलब्ध है। इस वजह से नए सीजन के लिए 9.10 लाख जूट बैग की खरीद करनी होगी।


खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चालू विपणन सीजन में खाद्यान्न की पैकिंग के लिए एफसीआई के साथ ही अन्य खरीद एजेंसियों को 12.30 लाख जूट बैग की आवश्यकता होगी। इसमें पंजाब और हरियाणा के पास इस समय 3.20 लाख बैग की उपलब्धता है। ऐसे में 9.10 लाख जूट बैग की खरीद करनी होगी।


उन्होंने बताया कि राज्यों के खाद्य सचिवों के साथ हाल ही में हुई बैठक में राज्यों ने अपनी-अपनी जरूरत बताई। पंजाब को 3.90 लाख जूट बैग की आवश्यकता होगी। जबकि पंजाब के पास तीन लाख बैग हैं इसलिए 90,000 बैग की और खरीद करनी होगी। इसी तरह से मध्य प्रदेश की आवश्यकता 2.88 लाख जूट बैग की है।


उसके पास पहले से बैग उपलब्ध न होने के कारण कुल 2.88 लाख बैग खरीदने होंगे। इसी तरह उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश को भी क्रमश: 1.84 लाख और 1.10 लाख जूट बैग की खरीद करनी होगी। हरियाणा को चालू विपणन सीजन में 2.58 लाख बैग की आवश्यकता होगी जबकि राज्य में इस समय 20,000 बैग उपलब्ध है। बाकी की खरीद करनी होगी।


केंद्र सरकार ने अप्रैल से शुरू होने वाले विपणन सीजन के लिए 320 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय किया है जबकि पिछले साल 283.4 लाख टन की हुई थी। नए खरीद सीजन के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1,285 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है जबकि उत्पादक मंडियों में दाम कम हैं। ऐसे में सरकारी खरीद तय अनुमान से भी ज्यादा होने की संभावना है। वैसे भी चालू रबी में गेहूं का रिकार्ड 883.1 लाख टन होने का अनुमान है

पैदावार घटने से चने में और तेजी की संभावना

बिजनेस भास्कर नई दिल्ली

विदेशी संकेत
ऑस्ट्रेलिया और तंजानिया से आयातित चने का भाव 3,625 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। ऑस्ट्रेलिया में चने का उत्पादन पिछले साल के 3.79 लाख टन से बढ़कर 4.85 लाख टन होने का अनुमान है।
वायदा में चना
एनसीडीईएक्स में चना अप्रैल वायदा चालू महीने में 12.2 फीसदी बढ़ चुका है। मुनाफावसूली से वायदा में दाम घट सकते हैं, इसलिए निवेशकों को गिरावट आने पर खरीद करनी चाहिए।

उत्पादन 82.2 लाख टन से घटकर 76.6 लाख टन रहने का सरकारी अनुमान

बुवाई क्षेत्रफल में कमी और बारिश की कमी से चने की प्रति हैक्टेयर उत्पादकता घटने से इसकी कीमतों में और तेजी की संभावना बन रही है। चालू महीने में ही चने की कीमतों में 12 फीसदी की तेजी आ चुकी है। दिल्ली बाजार में शनिवार को चने का भाव बढ़कर 3,850-3,900 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। हालांकि इन दिनों नए चने की आवक मंडियों में अच्छी चल रही है।


लेकिन सरकार के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चने के उत्पादन में 6.8 फीसदी की कमी आने का अनुमान है। हालांकि उद्योग के अनुसार उत्पादन सरकारी अनुमान से करीब 20 फीसदी कम रह सकता है।
कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार वर्ष 2011-12 में चने का उत्पादन 76.6 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल उत्पादन 82.2 लाख टन का हुआ था। मंत्रालय के अनुसार चने की बुवाई पिछले के मुकाबले थोड़ा ही कम है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी बुवाई आंकड़ों के अनुसार चालू रबी में चने की बुवाई 91.86 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल 92.22 लाख हैक्टेयर में हुई थी।


ग्लोबल दाल इंडस्ट्रीज के मैनेजिंग डायरेक्टर चंद्रशेखर एस. नादर ने बताया कि बारिश नहीं होने से चने के प्रति हैक्टेयर पैदावार में कमी आई है जबकि उत्पादक मंडियों में चने का बकाया स्टॉक भी नहीं के बराबर है। इसलिए चालू महीने में उत्पादक मंडियों में इसकी कीमतों में 300-400 रुपये की तेजी आकर भाव 3,500 से 3,600 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। इस समय कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की मंडियों में चने की दैनिक आवक एक से सवा लाख क्विंटल की हो रही है।


जबकि होली पर दैनिक आवक बढ़कर डेढ़ लाख क्विंटल को हो जाएगी। कीमतों में एकतरफा तेजी आई है इसलिए मुनाफावसूली से होली पर एक बार तो गिरावट आ सकती है लेकिन भविष्य तेजी का ही है। एमएम एग्रीचैम लिमिटेड के डायरेक्टर सुनिल सॉवला ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया और तंजानिया से आयातित चने का भाव 3,625 रुपये प्रति क्विंटल हो गया।
ऑस्ट्रेलिया में चने का उत्पादन पिछले साल के 3.79 लाख टन से बढ़कर 4.85 लाख टन होने का अनुमान है जिससे आस्ट्रेलिया से आयात बढऩे की संभावना है।


एनसीडीईएक्स पर अप्रैल महीने के वायदा अनुबंध में चालू महीने में चने के दाम 12.2 फीसदी बढ़ चुके हैं। दो फरवरी को अप्रैल महीने के वायदा अनुबंध में चने का भाव 3,225 रुपये प्रति क्विंटल था जबकि शनिवार को भाव 3,674 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। ऐंजल के एग्री विश्लेषक बदरुद्दीन ने बताया कि मुनाफावसूली से वायदा में दाम घट सकते हैं। इसीलिए निवेशकों को गिरावट के बाद खरीद करनी चाहिए